Thursday, 27 August 2015

मौत का एक फैसला बचाएगा कई जिंदगियां


-प्रदेश सरकार बना रही 'ब्रेन डेड घोषित करने की नीति
-संभव होगा अंगदान, कई लोगों को मिलेगा जीवनदान
डॉ.संजीव, लखनऊ
एक जिंदगी जाते-जाते कई जिंदगियों को संजीवनी दे सकती है, बशर्ते समय पर उसका नियोजन हो सके। प्रदेश सरकार इस दिशा में सकारात्मक काम कर मौत के एक फैसले से कई जिंदगिया बचाने का रास्ता निकाल रही है। जल्द ही सूबे में मृत्यु से हार चुके लोगों को 'ब्रेन डेड घोषित करने की नीति सामने आएगी, जिससे अंगदान कर कई लोगों को जीवनदान दिया जा सके।
अभी राज्य में 'ब्रेन डेडÓ घोषित करने की कोई नीति न होने के कारण दुर्घटनाओं में गंभीर हालत में पहुंचने वालों से लेकर तमाम अन्य मरीज भी मौत से लड़ाई लड़ते रहते हैं, जिनकी मृत्यु न सिर्फ तय हो चुकी होती है, बल्कि मस्तिष्क काम करना बंद कर देता है। चिकित्सकों का मानना है कि 'ब्रेन डेड होने की स्थिति में भी यदि मरीज को मृत घोषित कर दिया जाए तो उसके गुर्दे, दिल, यकृत, त्वचा, नेत्र और हड्डियों के कुछ हिस्सों को लेकर उनका प्रत्यारोपण किया जा सकता है। ऐसे में इन समस्याओं से जूझ रहे लोगों को न सिर्फ राहत मिल सकती है, बल्कि एक शरीर तमाम नई जिंदगियां दे सकने में सफल हो सकता है।
चिकित्सकों के मुताबिक कई बार मरीजों के परिजन तैयार होते हैं, फिर भी कानूनी डर से डॉक्टर इस दिशा में पहल नहीं करते। इसके अलावा तमाम अज्ञात गंभीर अवस्था में आते हैं, जिनकी 'ब्रेन डेथ हो जाने के बाद भी उनके शरीर के अंगों का प्रयोग नहीं हो पाता है। उत्तर प्रदेश ही नहीं, देश के अन्य राज्य भी इस समस्या से लंबे समय से जूझ रहे हैं। इस पर तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश व महाराष्ट्र ने 'ब्रेन डेड घोषित करने की अपनी नीति बना ली है। यहां भी लगातार मांग उठने पर प्रदेश शासन ने इस बाबत नीति बनाने का जिम्मा प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय को सौंपा। महानिदेशालय ने इस बाबत प्रस्ताव शासन को सौंप दिया है और जल्द ही इस पर फैसला हो जाएगा।
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विशेषज्ञों की समिति ने बनाई नीति
प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त सुविधाएं जुटाने के साथ गंभीर हालत में पहुंचे मरीजों के अंग-अंग का सदुपयोग किये जाने की दृष्टि से इस नीति को अंतिम रूप दिया गया है। इसमें संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान व किंग जार्जेज चिकित्सा विश्वविद्यालय के प्रत्यारोपण शल्य चिकित्सकों के साथ मिलकर बनी समिति ने विस्तृत नीति बनाई है।
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जिनका कोई नहीं, उन्हें लाभ
इस नीति के अमल में आने के बाद ऐसे मरीजों को अंग प्रत्यारोपण में ज्यादा लाभ मिलेगा, जिन्हें अंगदान करने वाला कोई नहीं होता। कई बार अंगदान के अभाव में उनकी मौत भी हो जाती है। नीति बन जाने से ऐसे लोगों को लाभ मिलेगा और तमाम जिंदगियां बचाई जा सकेंगी। -डॉ.जीके अनेजा, अपर चिकित्सा शिक्षा निदेशक

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