Sunday, 1 May 2016

समाज कल्याण अधिकारियों का संकट


-काम विभाजन भी महज औपचारिकता
-28 अफसरों की कमी, चार जिलों में एक भी नहीं
राज्य ब्यूरो, लखनऊ : हर जिलों में दो समाज कल्याण अधिकारियों की अवधारणा को मजबूती प्रदान करने के लिए उनके बीच काम विभाजित कर दिया गया है। वैसे प्रदेश में 28 अफसरों की कमी के कारण यह विभाजन महज औपचारिकता ही है। हालात ये हैं कि चार जिलों में तो एक भी अधिकारी नहीं है।
समाज कल्याण विभाग में जिला स्तर पर दो अधिकारियों की सीधी जिम्मेदारी होती है। एक जिला समाज कल्याण अधिकारी के साथ एक जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास) की तैनाती का नियम है। इस तरह प्रदेश में 150 जिला समाज कल्याण अधिकारी होने चाहिए। इसके विपरीत इस समय प्रदेश में कुल 122 जिला समाज कल्याण अधिकारी ही हैं। 28 अफसरों की कमी तो है ही, चार जिलों ललितपुर, संभल, बलरामपुर व उन्नाव में तो एक भी जिला समाज कल्याण अधिकारी नहीं है। इस बीच जिन 43 जिलों में समाज कल्याण अधिकारी व समाज कल्याण अधिकारी (विकास) दोनों पदों पर अधिकारी नियुक्त हैं, वहां भी काम का विभाजन न होने से दिक्कत हो रही थी। अब विभाग ने दोनों पदों के लिए कामकाज का विभाजन कर दिया है।
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इस काम की जिम्मेदारी
जिला समाज कल्याण अधिकारी: समाजवादी पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, पारिवारिक लाभ योजना, शादी योजना, अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार उत्पीडऩ योजना, वृद्ध एवं अशक्त गृह और उत्तर प्रदेश माता पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण से संबंधित कार्य, राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय का रखरखाव, विमुक्ति जाति योजना से संबंधित कार्य, राजकीय उन्नयन बस्ती व औद्योगिक आस्थान, डिजिटल सिग्नेचर, आहरण वितरण अधिकारी का कार्य, पूर्व दशम व दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना, अन्य अवशेष कार्य।
जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास): अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम से संबंधित कार्य, नि:शुल्क बोङ्क्षरग, स्वच्छकार विमुक्ति व पुनर्वास योजना, मेरिट उच्चीकृत योजना, अनुदानित विद्यालयों व संस्थाओं का रखरखाव, पॉलीटेक्निक, आइटीआइ, बुकबैंक योजना, डिजिटल सिग्नेचर। 

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