Monday, 16 May 2016

चार साल लूटी छात्रवृत्ति, अफसर जाएंगे जेल


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- पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 36 संस्थानों को काली सूची में डालने के आदेश
- मान्यता होगी वापस, अधिकारी और कर्मचारियों पर भी दर्ज होंगे मुकदमे
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : दशमोत्तर छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के नए-नए मामले सामने आ रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 36 संस्थानों द्वारा चार साल तक छात्रवृत्ति लूटने की पुष्टि होने पर अफसरों व कर्मचारियों को निलंबित कर जेल भेजने का फैसला हुआ है। ऐसे 36 संस्थानों को काली सूची में डालकर उनकी मान्यता वापस लेने के आदेश भी हुए हैं।
पिछले वर्ष अगस्त में दशमोत्तर छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति में गड़बड़ी करने वाले 200 संस्थान चिन्हित किये गए थे। हाल ही में इनमें से 36 संस्थानों में छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति में करोड़ों रुपये के घोटाले की पुष्टि हुई है। इन सभी में वित्तीय वर्ष 2011-12 से 2014-15 के बीच गड़बड़ी करने के आरोप हैं। समाज कल्याण निदेशक सुनील कुमार ने इस पर समाज कल्याण निदेशक को भेजे निर्देशों में कहा है कि 36 शिक्षण संस्थाओं में बड़े पैमाने पर फर्जी व छद्म विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश दर्शाकर छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की करोड़ों रुपये की शासकीय धनराशि का अनियमित रूप से भुगतान प्राप्त किये जाने की पुष्टि हुई है। इनमें से अधिकांश शिक्षण संस्थान सहारनपुर व उसके आसपास के हैं। प्रमुख सचिव ने ऐसी सभी शिक्षण संस्थाओं को तत्काल काली सूची में डालने, मान्यता वापस लेने, शासकीय धनराशि की वसूली करने और प्रकरण में संलिप्त अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराकर आवश्यक विधिक कार्यवाही करने के निर्देश दिये हैं। साथ ही वित्तीय वर्ष 2011-12 से 2014-15 के बीच वहां तैनात जिला समाज कल्याण अधिकारियों को चिन्हित कर उन्हें निलंबित करने के निर्देश दिये हैं। यह भी कहा है कि उनके खिलाफ आरोप पक्ष गठित कर 15 दिन के अंदर शासन को उपलब्ध कराएं। प्रकरण में दोषी लिपिकों व अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई कर आख्या शासन को भेजें।
कई विभागों की मिलीभगत
जांच में सरकारी अफसरों की मिलीभगत की भी पुष्टि हुई है। प्रमुख सचिव के मुताबिक शिक्षण संस्थाओं द्वारा शिक्षा विभाग एवं सोशल सेक्टर के विभिन्न कल्याण अधिकारियों की मिलीभगत से अभिलेखों में गड़बड़ी कर फर्जी व छद्म छात्र-छात्राओं को अनुमन्य सीट से अधिक संख्या में नामांकन दर्शाकर गबन किया गया है। इतने बड़े पैमाने पर डाटा सत्यापित व अग्रसारित होना शिक्षा, समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण व अल्पसंख्यक कल्याण विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।
ऐसी-ऐसी गड़बडिय़ां
-12 शिक्षण संस्थानों के 179 छात्र-छात्राएं ऐसे पाए गए जिनका प्रवेश फर्जी व संदिग्ध अंक पत्रों के आधार पर किया गया। उनके नाम पर अनियमित तरीके से छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि प्राप्त की गई।
-15 शिक्षण संस्थानों में कुल प्रवेश पाए विद्यार्थियों में 70 फीसद से अधिक अनुसूचित जाति के मिले। यह संख्या असामान्य रूप से अत्यधिक थी। बाद में अगली कक्षा में इनमें से 25 फीसद से भी कम छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया।
-17 शिक्षण संस्थाओं ने वर्ष 2014-15 के दशमोत्तर छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति संबंधी छात्र-छात्राओं के आवेदन पत्रों में अपने संस्थान का मोबाइल नंबर दर्ज कराया, जो प्रकरण को पूर्णतया संदिग्ध बनाता है।
-10 शिक्षण संस्थानों में 131 छात्र-छात्राएं ऐसे पाए गए जिनका विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में दो-दो बार प्रवेश दर्शाया गया। दो संस्थानों ने स्वीकृत सीटों के दोगुने प्रवेश लिये तथा तीन ने ऐसे पाठ्यक्रमों में भी प्रवेश लिये, जिनकी मान्यता ही नहीं थी।
-दो आइटीआइ ऐसे मिले, निकी शुल्क प्रतिपूर्ति दर 480 रुपये प्रति विद्यार्थी निर्धारित थी। इसके विपरीत विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों की मदद से प्रति छात्र 36 हजार रुपये की दर से भुगतान कर 2.45 करोड़ रुपये का गबन किया गया।
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