Sunday, 15 May 2016

परिवार कल्याण कार्यक्रमों पर अब रहेगी 'बाहरी नजर'


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-स्वास्थ्य विभाग कराएगा 'थर्ड पार्टी' मूल्यांकन, शासन से मिली मंजूरी
-प्रसव पूर्व से लेकर बाद तक के विविध आयामों पर मिलेगी निरपेक्ष रिपोर्ट
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डॉ.संजीव, लखनऊ
प्रदेश में परिवार कल्याण कार्यक्रमों के क्रियान्वयन व उनके संचालन से जुड़े तमाम आयामों पर अब 'बाहरी नजर' भी रहेगी। स्वास्थ्य विभाग ने इस वर्ष से इन कार्यक्रमों के 'थर्ड पार्टी' मूल्यांकन का प्रस्ताव किया था, जिसे शासन से मंजूरी मिल गयी है।
परिवार कल्याण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों के संचालन में तमाम गड़बडिय़ों की शिकायतें मिलती रहती हैं। दरअसल अभी इनके क्रियान्वयन से लेकर निगरानी तक का पूरा जिम्मा स्वास्थ्य विभाग के पास ही है। पिछले वर्ष से निजी क्षेत्र की सहभागिता बढ़ाने की मुहिम शुरू हुई है किन्तु अभी उस पर प्रभावी अमल नहीं हो सका है। अब स्वास्थ्य विभाग अपनी निगरानी प्रणाली के साथ विभाग से बाहर के लोगों को जोडऩे की पहल कर रहा है। प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) अरविंद कुमार के अनुसार प्रसव पूर्व सुविधाओं से लेकर प्रसव के बाद फॉलोअप व परिवार कल्याण कार्यक्रमों की जागरूकता तक सभी बिंदुओं पर बाहरी आकलन कराने का फैसला लिया गया है। इसके लिए स्वयंसेवी संगठनों, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रहे संगठनों व उनसे जुड़े लोगों का सहयोग लिया जाएगा। इसे 'थर्ड पार्टी इवैलुएशन सर्वे' नाम दिया गया है। पिछले दिनों मुख्य सचिव ने इस बाबत प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। साथ ही शुरुआती तौर पर इस कार्ययोजना के लिए एक करोड़ रुपये खर्च को हरी झंडी मिली है। जल्द ही इस पर अमल शुरू हो जाएगा। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की कमियां निरपेक्ष रूप में सामने आएंगी, जिनका समाधान सुनिश्चित होगा।
क्षमता बढ़ाने पर रहेगा जोर
परिवार कल्याण कार्यक्रमों के निरपेक्ष मूल्यांकन के साथ ही इस पूरे अभियान से जुड़े लोगों की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक आलोक कुमार के अनुसार हर मंडल मुख्यालय पर 'क्लीनिकल आउटरीच टीम्स' सक्रिय की जाएंगी। ये टीमें जरूरत पर दूरस्थ अंचलों तक जाकर परिवार कल्याण सेवाओं को मूर्त रूप देंगी। पहले चरण में 2.72 करोड़ रुपये आवंटित भी कर दिये गए हैं। सिफ्सा की मदद लेकर सेवा प्रदाताओं की क्षमता वृद्धि के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलेंगे। इसके लिए भी 1.05 करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं। सारी प्रक्रिया ऑनलाइन करने के लिए 'लॉजिस्टिक मैनेजमेंट इनफॉर्मेशन सिस्टम' विकसित किया जा रहा है।
हर जिले में छह टीमें
प्रदेश सरकार में इस तरह 'थर्ड पार्टी' मूल्यांकन की पहल तकनीकी सहयोग इकाई के माध्यम से हुई है। इकाई के मुखिया विकास गोथलवाल के मुताबिक 25 जिलों से इसकी शुरुआत के लिए 150 टीमें बनायी गयीं। दूसरे चरण में 50 जिलों में इस योजना पर अमल का प्रस्ताव है। हर जिले में औसतन छह टीमें तैनात होंगी और वे ब्लॉक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर तक योजनाओं के क्रियान्वयन व उसमें आ रही बाधाओं पर अपनी रिपोर्ट देंगी।

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