Tuesday, 17 May 2016

सरकारी इंजीनियरिंग कालेजों में 'फोर स्टार' हॉस्टल-मेस


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-निदेशकों की बैठक में मुख्य सचिव ने दिये निर्देश
-सौर ऊर्जा के साथ वाई-फाई कैम्पस पर भी जोर
-इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट की लेंगे मदद
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : सरकारी इंजीनियरिंग कालेजों के हॉस्टल व मेस का स्वरूप अब बदलने वाला है। जल्द ही ये किसी 'फोर स्टार' होटल की तरह नजर आएंगे। मंगलवार को यहां सभी निदेशकों की बैठक में यह फैसला हुआ।
प्रदेश में सरकारी क्षेत्र के 14 इंजीनियरिंग कालेज संचालित हैं। प्राविधिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव मुकुल सिंघल ने मंगलवार को इन सभी के निदेशकों की बैठक बुलाई थी। बैठक में कहा गया कि सरकारी इंजीनियरिंग कालेजों के सामने साख का संकट है और उन्हें कड़ा मुकाबला करना है। पढ़ाई-लिखाई मजबूत करने के साथ ही वहां पढऩे वाले छात्र-छात्राओं को उत्कृष्ट वातावरण मुहैया कराना भी जरूरी है। इसके लिए उनके खान-पान का स्तर ऊंचा करने पर जोर दिया गया। तय हुआ कि सभी कालेजों के छात्रावासों व मेस को आकर्षक स्वरूप दिया जाए। इनमें रहन-सहन व भोजन आदि का स्तर भी सुधारा जाए। इसके लिए केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की संस्था लखनऊ स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (आइएचएम) का सहयोग लिया जाएगा। बैठक में मौजूद आइएचएम के निदेशक से प्रमुख सचिव ने कहा कि इन कालेजों के हॉस्टल व मेस किसी भी 'फोर स्टार' होटल से कम न लगें। इसके लिए डिजाइन व अन्य प्रारूप समयबद्ध ढंग से तैयार किये जाने को कहा।
हर कालेज के पूरे कैम्पस को वाई-फाई करने की बात कही गयी। तय हुआ कि महज शैक्षणिक परिसर ही नहीं, छात्रावासों तक को वाई-फाई से कनेक्ट किया जाएगा, ताकि छात्र-छात्राओं को कोई समस्या न हो। सभी परिसरों को सौर ऊर्जा से जोडऩे के काम को तेज करने की बात भी कही गयी। बताया गया कि हर इंजीनियरिंग कालेज का औसत बिजली बिल डेढ़ से दो लाख रुपये प्रति माह के आसपास आता है। सौर ऊर्जा के माध्यम से यह राशि बचाई जा सकती है। इन सभी कामों पर होने वाला खर्च डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय वहन करेगा। प्रमुख सचिव ने कहा कि ये सभी काम अगले शैक्षिक सत्र की शुरुआत से पहले पूरी कर ली जाएं, ताकि नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं को उसका लाभ मिल सके।
शिक्षक नियुक्ति दो माह में
इस ब ठक के लिए भेजी गयी सूचना में निदेशकों से शिक्षकों के खाली पदों का ब्योरा लेकर आने को कहा गया था। इसके बावजूद अधिकांश निदेशक यह ब्योरा लेकर नहीं आए थे। इस पर प्रमुख सचिव ने आक्रोश जाहिर किया। कहा कि संस्थानों के नेतृत्व की लापरवाही से उनके विकास में संकट आता है। उन्होंने अगले दो दिनों में पूरा ब्योरा भेजने को कहा, ताकि प्राविधिक विश्वविद्यालय के स्तर पर समय से भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो सके। अगले दो माह में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

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