Friday, 2 September 2016

स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को छोडऩा होगा दफ्तर

-स्वास्थ्य महानिदेशक से डिप्टी सीएमओ तक निरीक्षण के निर्देश
-शासन को भेजना पड़ेगा नियमित ब्योरा, तय की जाएगी जवाबदेही
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ: स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को अब दफ्तर छोड़कर जाना ही होगा। इसके लिए स्वास्थ्य महानिदेशक से उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी (डिप्टी सीएमओ) तक सभी को निरीक्षण करने के निर्देश दिये गए हैं। शासन का मानना है कि इससे डेंगू व अन्य संक्रामक बीमारियों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के स्तर पर पकडऩे में भी मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य विभाग में महानिदेशक से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी तक डॉक्टरों की तैनाती के बावजूद प्रदेश में चौपट स्वास्थ्य सेवाओं की शिकायतें आम हैं। नियमानुसार राजधानी में महानिदेशालय में तैनात अधिकारियों से लेकर जिलों में उप मुख्य चिकित्सा अधिकारियों तक, सभी को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) तक जाकर नियमित निरीक्षण करने चाहिए, किन्तु ऐसा नहीं हो रहा है। इस पर प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) अरुण सिन्हा ने सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य महानिदेशक से डिप्टी सीएमओ तक हर अधिकारी को निश्चित रूप से प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के निरीक्षण करने होंगे। वहां चिकित्सकों की उपस्थिति, दवाओं की उपलब्धता, जांच की प्रगति व मरीजों को मिल रही सुविधाओं का पूरा ब्योरा जुटाना होगा। निरीक्षण की पूरी जानकारी नियमित रूप से शासन को भेजनी होगी। प्रमुख सचिव ने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के स्तर तक पहुंचने वाले मरीजों के इलाज के साथ उन्हें जरूरत पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल भेजने की स्थितियों का आंकलन भी हो सकेगा। इससे अस्पतालों में चिकित्सकों की समय पुर उपस्थिति भी सुनिश्चित होगी। इसके साथ ही जवाबदेही भी तय की जाएगी। लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई भी होगी।
वीकेंड में जाएंगे निदेशक
शुक्रवार होते-होते तमाम डॉक्टर स्वास्थ्य केंद्रों से गायब हो जाते हैं। इसलिए महानिदेशक सहित मुख्यालय में तैनात अपर महानिदेशक, निदेशक जैसे अधिकारियों को सप्ताहांत (वीकेंड) में निरीक्षण के निर्देश दिये गए हैं। कई बार शासन में नियमित बैठकों व प्रशासनिक कार्यों का हवाला दिया जाता है, इसलिए प्रमुख सचिव ने शुक्रवार को कोई बैठक न करने का फैसला किया है। ये लोग शुक्रवार से रविवार तक निरीक्षण करेंगे और उसकी पूरी जानकारी प्रमुख सचिव को सोमवार को देंगे।
अफसरी में भूले इलाज
स्वास्थ्य विभाग में अफसर बने तमाम चिकित्सक तो मानो इलाज करना ही भूल गए हैं। महानिदेशालय में तैनात डॉक्टर हों या सीएमओ, अपर निदेशक और अस्पतालों के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस), इनमें से तमाम ने वर्षों से मरीज नहीं देखे हैं। कुछ सीएमएस अपनी ड्यूटी ओपीडी में लगवा लेते हैं किन्तु ज्यादातर समय मरीज देखते ही नहीं हैं। शासन स्तर से कई बार सीएमओ, अपर निदेशक व महानिदेशालय में तैनात चिकित्सकों के लिए मरीज देखने के निर्देश भी जारी किये गए किन्तु इस पर अमल नहीं होता है। 

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