Wednesday, 10 August 2016

इलाज तुम करो, गुणवत्ता हम संभालेंगे

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-मंडल व जिला स्तर पर जन स्वास्थ्य सलाहकारों की नियुक्ति
-414 अस्पतालों में गुणवत्ता सुधार और 715 का कायाकल्प
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : स्वास्थ्य विभाग इलाज व गुणवत्ता के साथ अस्पताल प्रबंधन को समानांतर दायित्व के रूप में विकसित करने की पहल कर रहा है। पहले चरण में प्रदेश के 414 अस्पतालों को चिह्नित कर उनकी गुणवत्ता पर फोकस किया जाएगा। साथ ही 717 अस्पतालों के कायाकल्प की तैयारी है।
अस्पतालों में मरीजों का इलाज न हो रहा हो, या वार्डों में गंदगी फैली हो, परेशान होकर लोग स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के पास ही जाते हैं। वे भी इलाज के अलावा सब कुछ करते नजर आते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अब इलाज और प्रबंधन को अलग-अलग करने की रणनीति बनाई है। 414 जिला अस्पतालों, सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को चिह्नित किया गया है। कायाकल्प योजना के लिए 157 जिला स्तरीय चिकित्सालयों, 189 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व 369 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को चिह्नित किया गया है। मंडल व जिला स्तर पर जन स्वास्थ्य सलाहकारों व जिला अस्पतालों में गुणवत्ता प्रबंधक तैनात किये गए हैं। मंडल व जिला स्तर पर क्वालिटी एश्योरेंस समितियों का गठन किया जा रहा है। जिला समितियां हर माह व मंडल समितियां तीन माह में बैठक कर रिपोर्ट नियमित रूप से शासन को भेजेंगी। पूरी प्रक्रिया पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व मंडलीय अपर निदेशक नजर रखेंगे।
दवा से खून तक चिंता
सलाहकारों को दवा से लेकर खून उपलब्धता के साथ प्रदूषण, अग्निशमन व रक्तकोषों के मानक बरकरार रखने तक की चिंता करनी होगी। अस्पताल में मरीजों को भटकना न पड़े, इसलिए दिशा निर्देश लगाने होंगे। वेटिंग एरिया साफ सुथरे व सुविधायुक्त बनाने के साथ पार्किंग, सुरक्षा, भोजन व लांड्री आदि के संचालन की जिम्मेदारी इन्हें दी जाएगी।
संक्रमण नियंत्रण पर जोर
योजना में संक्रमण नियंत्रण पर सर्वाधिक जोर है। अस्पताल स्तर पर इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी बनेंगी। नियमित सफाई व संक्रमण रोकने के साथ स्टाफ का मेडिकल परीक्षण व टीकाकरण भी होगा। जैवचिकित्सकीय कचरे पर रोक के साथ वार्डों व ऑपरेशन थियेटर ही नहीं, पैथोलॉजी परीक्षणों के समय भी संक्रमण निषेध सुनिश्चित किया जाएगा।
डॉक्टर इलाज पर करें फोकस
गुणवत्ता व प्रबंधन की जिम्मेदारी अलग हाथों में देने के पीछे मुख्य वजह डॉक्टरों पर लोड कम करना है। वे इलाज पर फोकस करें और अन्य चिंताएं ये क्वालिटी मैनेजर कर लेंगे। साल भीतर इसके परिणाम दिखने लगेंगे। -आलोक कुमार, निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन

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