Wednesday, 6 April 2016

इंजीनियरिंग कालेज चाहते 'शट डाउन'


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-एकेटीयू ने शासन को भेजे 37 कालेजों के आवेदन
-बीटेक के साथ एमबीए-एमसीए भी चाहते बंदी
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : कुछ वर्ष पूर्व पूरे उत्तर प्रदेश में तेजी से खुले इंजीनियरिंग कालेज अब बंद होना चाहते हैं। एकेटीयू ने ऐसे 37 मामले शासन को संदर्भित किये हैं। इनमें बीटेक के साथ एमबीए व एमसीए पाठ्यक्रमों को बंद करने के आवेदन भी शामिल हैं।
इक्कीसवीं सदी शुरू होने के साथ ही उत्तर प्रदेश के शैक्षिक जगत में सबसे बड़ा बदलाव तेजी से इंजीनियरिंग कालेज खुलने के रूप में सामने आया था। कंप्यूटर विशेषज्ञों की मांग बढऩे के कारण एमसीए शिक्षण संस्थान और प्रबंधन शिक्षा देने वाले एमबीए शिक्षण संस्थान भी इसी रफ्तार से खुले। कुछ वर्षों में इंजीनियरिंग व प्रबंधन शिक्षा को लेकर घटे उत्साह से इन संस्थानों में प्रवेश के लाले पड़ रहे हैं। परिणाम है कि निजी इंजीनियरिंग व प्रबंधन संस्थान अब कालेज बंद कर उन परिसरों में पब्लिक स्कूल या सामान्य डिग्र्री कालेज खोलना चाहते हैं। इन संस्थानों को संबद्धता देने वाले डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम विश्वविद्यालय (एकेटीयू) ने हाल ही में शासन को 37 ऐसे आवेदन अग्र्रसारित किये हैं, जिन्होंने बीटेक, एमबीए या एमसीए पाठ्यक्रमों के संचालन से मुक्ति चाही है।
एक समय में लखनऊ व नोएडा के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिले इंजीनियरिंग शिक्षा के बड़े केंद्र के रूप में उभरे थे। शिक्षा का स्तर बरकरार न रख पाने, उपयुक्त रोजगार के अवसर सृजित न कर पाने के कारण सर्वाधिक प्रभावित भी यही क्षेत्र हुए हैं। बंदी का आवेदन करने वालों में सर्वाधिक आवेदन लखनऊ के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश से ही हैं। मथुरा, बरेली, मेरठ, नोएडा, बुलंदशहर, गाजियाबाद, आगरा, हापुड़ के सर्वाधिक कालेजों ने पाठ्यक्रम बंदी के लिए आवेदन किये हैं। तमाम कालेजों ने सिविल इंजीनियरिंग, केमिकल इंजीनियरिंग, इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग, आटोमोबाइल इंजीनियरिंग की शाखाओं में पढ़ाई बंद करने की अनुमति मांगी है। कुछ वर्ष पूर्व जहां विद्यार्थियों की बढ़ी संख्या के मद्देनजर तमाम संस्थानों ने दूसरी शिफ्ट भी शुरू कर दी थी, उन्होंने दूसरी शिफ्ट बंद करने के आवेदन भी दिये हैं। इसके अलावा सीटें कम करने के भी दर्जन भर आवेदन आए हैं। इस दौरान छात्राओं के लिए अलग से इंजीनियरिंग कालेज भी खोले गए थे, किन्तु उनमें पर्याप्त संख्या में प्रवेश न होने के कारण उनके स्वरूप में बदलाव कर छात्रों को भी प्रवेश देने की अनुमति मांगी गयी है।

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