Wednesday, 6 April 2016

शोध के दायरे में बुनकर से कुम्हार तक


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-इनोवेशन व इन्क्यूबेशन केंद्रों की नीति निर्धारित
-कानपुर, लखनऊ व गोरखपुर में बनेंगे नोडल सेंटर
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : सूबे के इंजीनियरिंग कालेज अब बुनकरों से कुम्हारों तक के लिए शोध करेंगे। शासन ने प्रस्तावित इनोवेशन व इन्क्यूबेशन केंद्रों की नीति निर्धारित करते हुए कानपुर, लखनऊ व गोरखपुर में नोडल सेंटर बनाने का एलान किया है।
प्रदेश सरकार ने डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के आर्थिक संसाधनों से प्रदेश में इनोवेशन व इन्क्यूबेशन केंद्रों की स्थापना का फैसला किया है। प्राविधिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव मुकुल सिंहल ने बताया कि एचबीटीआइ कानपुर में सिविल व केमिकल इंजीनियरिंग, यूपीटीटीआइ कानपुर में टेक्सटाइल इंजीनियरिंग, आइईटी लखनऊ में इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस और इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी, एमएमएमयूटी गोरखपुर में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विधाओं के नोडल सेंटर स्थापित किये जाएंगे। प्रदेश के अन्य जिलों के इंजीनियरिंग कालेजों को इन नोडल सेंटर्स से संबद्ध किया जाएगा। इन केंद्रों के माध्यम से शिल्पकारों, बुनकरों, किसानों के साथ बढ़ई व कुम्हारों तक के लिए उपयोगी शोध पर जोर दिया जाएगा।
उत्पादकता बढ़ाने पर जोर
नीति मेंं इन केंद्रों के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने पर पूरा जोर दिया गया है। छह उद्देश्य परिभाषित करते हुए कहा गया है कि ये केंद्र नवीनतम तकनीकी एवं व्यावसायिक विचारों को वास्तविक उत्पाद एवं सेवाओं में परिवर्तित करेंगे। कृषि, विज्ञान, सेवाओं, तकनीकी आदि में नवीनतम अन्वेषण को मूर्त रूप में साकार करने पर जोर होगा। ऐसे उत्पाद विकसित किये जाएंगे जो वाणिज्यिक रूप से व्यावहारिक हों। लघु व मध्यम श्रेणी के उद्योगों में उत्पादकता बढ़ाने के उपाय किये जाएंगे। उद्योगों व अन्य संस्थाओं को परीक्षण सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। व्यावसायिक उत्पादन में जाने से पूर्व नए उत्पाद को बाजार से संबंधित सहायता भी प्रदान की जाएगी।
हर जिले में स्क्रीनिंग कमेटी
उत्तर प्रदेश के हर नागरिक या यहां पंजीकृत हर संस्था को इन इन्क्यूबेशन व इनोवेशन केंद्रों का लाभ उठाने का मौका मिलेगा। इसके लिए आवेदनों को मंजूरी देने के लिए हर जिले में स्क्रीनिंग कमेटी बनेगी। इस कमेटी के अध्यक्ष राजकीय इंजीनियरिंग कालेज के निदेशक और समन्वयक राजकीय पॉलीटेक्निक के प्रधानाचार्य होंगे। जिले में राजकीय इंजीनियरिंग कालेज न होने पर समन्वयक ही स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष भी होंगे। स्क्रीनिंग समिति के स्तर पर पारित प्रस्ताव तीनों नोडल सेंटर्स के पास भेजे जाएंगे, जहां उन पर अंतिम फैसला होगा।
पढ़ाई न बने आधार
नीति में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी भी प्रस्ताव को निरस्त करने के लिए पढ़ाई को बिल्कुल आधार न बनाया जाए। तर्क दिया गया है कि धरती से जुड़ी आम आदमी की बहुत सी समस्याओं के अनपढ़ अथवा कम पढ़े लिखे लोगों व संसाधन विहीन व्यक्तियों के पास भी होते हैं। अत: यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी विचार या प्रस्ताव को अपेक्षाकृत कम पढ़े लिखे, कमजोर अथवा संसाधन विहीन व्यक्ति द्वारा दिये जाने के कारण निरस्त न कर दिया जाए। स्क्रीनिंग कमेटी ऐसे सभी प्रस्तावों का परीक्षण करे और उसमें संभावना दिखे तो उन्हें मूर्त रूप देना सुनिश्चित किया जाए। 

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