Tuesday, 12 April 2016

निजी मेडिकल कालेजों पर नहीं कोई अंकुश

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-चिकित्सा शिक्षा विभाग नहीं कर सका शुल्क निर्धारण
-नया सत्र आते ही शुरू हुई मनमानी दरों पर 'बुकिंग'
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : प्रदेश सरकार तमाम घोषणाओं के बावजूद निजी मेडिकल व डेंटल कालेजों पर कोई अंकुश नहीं लगा सकी है। हालात ये हैं कि चिकित्सा शिक्षा विभाग शुल्क तक निर्धारित नहीं कर सका है। नया सत्र नजदीक आते ही एक बार फिर मनमानी दरों पर 'बुकिंग' शुरू हो गयी है।
प्रदेश में निजी क्षेत्र के 14 मेडिकल कालेज, 25 डेंटल कालेज व 14 आयुर्वेदिक कालेज संचालित हो रहे हैं। इनके प्रवेश से लेकर शुल्क तक पर कहीं भी शासन का अंकुश न होने के कारण लगातार आर्थिक अराजकता की शिकायतें आती रहती हैं। तमाम शिकायतों के बाद पिछले वर्ष प्रदेश सरकार ने निजी चिकित्सा संस्थानों का शुल्क तय करने का फैसला किया था। इसके लिए शुल्क निर्धारण प्रक्रिया शुरू कर सभी कालेजों से आय-व्यय का लेखा-जोखा भी मांगा जा सका था। यह प्रक्रिया भी 11 साल बाद शुरू हो सकी थी। इससे पहले वर्ष 2004 में निजी कालेजों का शुल्क निर्धारण हुआ था। तब तय हुआ था कि हर तीन साल में शुल्क निर्धारण होगा किन्तु उसके बाद से सत्ता-प्रतिष्ठान से नजदीकियों के आधार पर निजी कालेजों के संचालकों ने शुल्क निर्धारण ही नहीं होने दिया और लगातार मनमानी वसूली करते रहे।
बीते वर्ष शुल्क निर्धारण प्रक्रिया शुरू होने पर उम्मीद बंधी थी किन्तु निराशा ही हाथ लगी है। एक साल बीतने आए किन्तु अधिकांश निजी कालेजों ने यह लेखा-जोखा तक नहीं सौंपा है। एक साल बाद भी शुल्क निर्धारण न होने का परिणाम है कि अगले शैक्षिक सत्र के लिए निजी कालेजों ने 'बुकिंग' शुरू कर दी है। मनमाने तरीके से शुल्क की दरें निर्धारित कर दी गयी हैं। इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ.अनूपचंद्र पाण्डेय का कहना है कि जल्द ही नए सिरे से शुल्क निर्धारण प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कोशिश होगी कि शैक्षिक सत्र 2016-17 की शुरुआत से पहले सभी निजी चिकित्सा शिक्षा संस्थानों का शुल्क तय हो जाए।
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1500 करोड़ वार्षिक का 'खेल'
निजी कालेजों में शुल्क वसूली के नाम पर हर साल औसतन 1500 करोड़ रुपये का 'खेल' होता है। बीएएमएस के लिए तीन से चार लाख, बीडीएस के लिए पांच से छह लाख और एमबीबीएस के लिए दस से बारह लाख रुपये प्रतिवर्ष तक वसूले जाते हैं। कुल 53 निजी चिकित्सा शिक्षा संस्थानों में एमबीबीएस की 1500, बीडीएस की 2500 व बीएएमएस की 1000 सीटें हैं। इस तरह हर वर्ष इन कालेजों में औसतन 25 हजार विद्यार्थी पढ़ रहे होते हैं। इन सभी से कुल मिलाकर 1500 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष वसूले जाते हैं।
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