Tuesday, 12 July 2016

अक्टूबर से पहले 'इलाज' की मशक्कत


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-अस्पतालों व मेडिकल कालेजों में निर्माण कार्य हुए तेज
-मुख्यमंत्री सचिवालय से की जा रही नियमित समीक्षा
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश सरकार सेहत के ढांचे को मजबूत कर अक्टूबर से पहले पूरे 'इलाज' की मशक्कत कर रही है। अस्पतालों के निर्माण से लेकर मेडिकल कालेजों के उन्नयन तक, सभी काम समयबद्ध ढंग से पूरे करने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री सचिवालय से इन सभी कार्यों की नियमित समीक्षा की जा रही है, ताकि समय पर लोकार्पण कराया जा सके।
प्रदेश के सभी नए-पुराने मेडिकल कालेजों में इस समय उन्नयन के साथ निर्माण कार्य चल रहे हैं। विदेश दौरे से लौटने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्वयं इन कालेजों में निर्माण आदि की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री सचिवालय इस दिशा में अधिक सक्रिय हो गया है। सभी मेडिकल कालेजों में सीटी स्कैन, एमआरआइ मशीनों की स्थापना 31 अक्टूबर तक हर हाल में कर लेने के निर्देश दिये गए हैं। साथ ही 30 सितंबर से पहले सभी उपकरणों को क्रियाशील करने का लक्ष्य दिया गया है। कानपुर में न्यूरोलॉजी सेंटर व चिकित्सकों के आवासों के निर्माण, आगरा में सर्जरी व एलाइड स्पेशलिटी विभाग का निर्माण व उसमें मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर की स्थापना, झांसी में 500 बेड के अस्पताल भवन का निर्माण व अन्य जीर्णोद्धार, मेरठ में मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर, लेक्चर थियेटर व केंद्रीय पुस्तकालय का निर्माण, गोरखपुर में 500 बेड के बाल रोग चिकित्सालय का निर्माण और फार्मेसी व पैरमेडिकल भवनों में पाठ्यक्रमों का नियोजन, इलाहाबाद में ट्रामा सेंटर निर्माण जैसे काम हर हाल में अक्टूबर से पहले पूरे करने के निर्देश दिये गए हैं, ताकि इनका लोकार्पण मुख्यमंत्री से कराया जा सके। इन कार्यों की समयबद्ध निर्माण प्रक्रिया की समीक्षा के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ.अनूप चंद्र पाण्डेय ने बुधवार को सभी प्राचार्यों की बैठक बुलाई है।
स्वास्थ्य विभाग भी जिला व मंडल स्तर पर अस्पतालों के उन्नयन के साथ नए अस्पतालों को अक्टूबर तक हर हाल में शुरू करने के लिए सक्रिय हो गया है। प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) अरविंद कुमार के मुताबिक प्रदेश के 50 जिला महिला चिकित्सालयों में 100 बेड के मैटरनिटी विंग में से आठ का निर्माण पूरा हो चुका है और 34 विंग का काम अक्टूबर तक हर हाल में पूरा हो जाएगा। शेष आठ का काम भी तेजी से करने के निर्देश दिये गए हैं। इसी तरह 50 बेड के 12 मैटरनिटी विंग भी अगले माह तक हर हाल में पूरे हो जाएंगे। अक्टूबर तक ही 30 बेड के 78 जच्चा-बच्चा अस्पतालों की सक्रियता का लक्ष्य रखा गया है।  जिला व मंडल स्तर पर अस्पतालों में उच्च स्तरीय तकनीकी उपचार सुविधाएं भी अक्टूबर से पहले शुरू हो जाएंगी।

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